24 अगस्त 2022

Excel - PMT,IPMT, PPMT,CUMIPMT,CUMPRINC Functions

 

  1. PMT

    PMT फंक्शन के जरिये एक्सेल में EMI देय राशि को कैलकुलेट कर सकते हैं जिसके लिए हमें समय और दर का पता होना चाहिए।
    PMT फंक्शन का सिंटैक्स निम्न प्रकार से होता है...
    =PMT(rate,nper,pv,[fv],[type]
    Rate - लोन अमाउंट पर जो ब्याज दर लगता है। ध्यान रहे रेट अगर वार्षिक हो तो हम 12 से विभाजित करते हैं।
    nper - लोन अमाउंट को पेमेंट करने में लगा कुल समय। जब हम EMI चुकाते हैं तो हमें क़िस्त महीने में देय होता है अतः अगर हमे लोन चुकाने में वर्षों लग जाए या समय वर्ष में दिया हो तो समय के साथ हम 12 को गुना कर देते हैं ताकि वार्षिक समय महीने में बदल जाय।
    PV - कुल पेमेंट करने योग्य लोन अमाउंट। या फिर इसे वर्तमान राशि भी कह सकते हैं।
    FV - नकद राशि अगर देते हैं तब इसका प्रयोग किया जायेगा समान्यता इसको हम "0" कर देते हैं।
    type - पेमेंट करने का समय। अगर क़िस्त की पेमेंट हम समय से पहले करते हैं तो "1" या फिर समय के बाद या अंत में करते हैं तो "0" का प्रयोग करते हैं।

  2. IPMT

    IPMT फंक्शन का प्रयोग EMI जमा करने में केवल लगा हुआ ब्याज का पता करने के लिए किया जाता है।
    IPMT फंक्शन का सिंटैक्स निम्न प्रकार से होता है...
    =IPMT(RATE,PER,NPER,PV)
    Rate - लोन अमाउंट पर जो ब्याज दर लगता है। ध्यान रहे रेट अगर वार्षिक हो तो हम 12 से विभाजित करते हैं।
    per - किस महीने का क़िस्त निकलना है।
    nper - लोन अमाउंट को पेमेंट करने में लगा कुल समय। जब हम EMI चुकाते हैं तो हमें क़िस्त महीने में देय होता है अतः अगर हमे लोन चुकाने में वर्षों लग जाए या समय वर्ष में दिया हो तो समय के साथ हम 12 को गुना कर देते हैं ताकि वार्षिक समय महीने में बदल जाय।
    PV - कुल पेमेंट करने योग्य लोन अमाउंट। या फिर इसे वर्तमान राशि (प्रिंसिपल अमाउंट) भी कह सकते हैं।

  3. PPMT

    PPMT - क़िस्त भरते समय इंटरेस्ट(ब्याज) अमाउंट को छोड़कर जो EMI अमाउंट होता है उसका पता लगाने के लिए हम इस फंक्शन का उपयोग करते हैं।
    PPMT फंक्शन का सिंटैक्स निम्न प्रकार से होता है...
    =PPMT(RATE,PER,NPER,PV)
    Rate - लोन अमाउंट पर जो ब्याज दर लगता है। ध्यान रहे रेट अगर वार्षिक हो तो हम 12 से विभाजित करते हैं।
    per - किस महीने का क़िस्त निकलना है।
    nper - लोन अमाउंट को पेमेंट करने में लगा कुल समय। जब हम EMI चुकाते हैं तो हमें क़िस्त महीने में देय होता है अतः अगर हमे लोन चुकाने में वर्षों लग जाए या समय वर्ष में दिया हो तो समय के साथ हम 12 को गुना कर देते हैं ताकि वार्षिक समय महीने में बदल जाय।
    PV - कुल पेमेंट करने योग्य लोन अमाउंट। या फिर इसे वर्तमान राशि (प्रिंसिपल अमाउंट) भी कह सकते हैं।

  4. CUMIPMT

    CUMIPMT - इसका प्रयोग किसी खास समय में लगे ब्याज को जानने के लिए किया जाता है।
    CUMIPMT फंक्शन का सिंटैक्स निम्न प्रकार से होता है...
    =CUMIPMT(rate, nper, pv, start_period, end_period, type)
    Rate - लोन अमाउंट पर जो ब्याज दर लगता है। ध्यान रहे रेट अगर वार्षिक हो तो हम 12 से विभाजित करते हैं।
    nper - लोन अमाउंट को पेमेंट करने में लगा कुल समय। जब हम EMI चुकाते हैं तो हमें क़िस्त महीने में देय होता है अतः अगर हमे लोन चुकाने में वर्षों लग जाए या समय वर्ष में दिया हो तो समय के साथ हम 12 को गुना कर देते हैं ताकि वार्षिक समय महीने में बदल जाय।
    PV - कुल पेमेंट करने योग्य लोन अमाउंट। या फिर इसे वर्तमान राशि (प्रिंसिपल अमाउंट) भी कह सकते हैं।
    Start_period - किस महीने से
    End_period - किस महीने तक का हमें ब्याज ज्ञात करना है।
    Type -पेमेंट करने का समय। अगर क़िस्त की पेमेंट हम समय से पहले करते हैं तो "1" या फिर समय के बाद या अंत में करते हैं तो "0" का प्रयोग करते हैं।

  5. CUMPRINC

    CUMPRINC - इसका प्रयोग किसी खास समय में ब्याज को छोड़ लगी राशि को जानने के लिए किया जाता है।
    CUMPRINC फंक्शन का सिंटैक्स निम्न प्रकार से होता है...
    =CUMPRINC (rate, nper, pv, start_period, end_period, type)
    Rate - लोन अमाउंट पर जो ब्याज दर लगता है। ध्यान रहे रेट अगर वार्षिक हो तो हम 12 से विभाजित करते हैं।
    nper - लोन अमाउंट को पेमेंट करने में लगा कुल समय। जब हम EMI चुकाते हैं तो हमें क़िस्त महीने में देय होता है अतः अगर हमे लोन चुकाने में वर्षों लग जाए या समय वर्ष में दिया हो तो समय के साथ हम 12 को गुना कर देते हैं ताकि वार्षिक समय महीने में बदल जाय।
    PV - कुल पेमेंट करने योग्य लोन अमाउंट। या फिर इसे वर्तमान राशि (प्रिंसिपल अमाउंट) भी कह सकते हैं।
    Start_period - किस महीने से
    End_period - किस महीने तक का हमें ब्याज को छोड़ कर लगी राशि ज्ञात करना है।
    Type -पेमेंट करने का समय। अगर क़िस्त की पेमेंट हम समय से पहले करते हैं तो "1" या फिर समय के बाद या अंत में करते हैं तो "0" का प्रयोग करते हैं।

इसे ज्यादा अच्छे से प्रैक्टिकल से समझने के लिए हमारे नीचे के वीडियो को अवश्य देखे। पसंद आये तो लाइक करें सब्सक्राइब करे और शेयर करें।

 

https://www.youtube.com/watch?v=a7AsvKo7fuo

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